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लखनऊ मानव तस्करी गिरोह: मदद के बहाने नाबालिग लड़कियों को राजस्थान में बेचने का खुलासा, पुलिस ने चार आरोपियों को दबोचा

 


हाइलाइट्स

  • नाबालिग लड़कियों की तस्करी के मामले में लखनऊ पुलिस को बड़ी सफलता मिली।

  • मदद और मां से मिलाने का झांसा देकर दो बहनों को राजस्थान भेजने की साजिश रची गई।

  • पुलिस ने 150 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगालकर आरोपियों तक पहुंच बनाई।

  • गिरोह गरीब और बेसहारा परिवारों की बच्चियों को निशाना बनाता था।

  • हर लड़की के बदले आरोपियों को एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक मिलने की बात सामने आई।

लखनऊ में नाबालिग लड़कियों की तस्करी का बड़ा खुलासा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है। नाबालिग लड़कियों की तस्करी के इस मामले में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो आर्थिक रूप से कमजोर और बेसहारा लड़कियों को बहला-फुसलाकर राजस्थान में शादी के नाम पर बेच देता था।

लखनऊ पुलिस की जांच में सामने आया कि यह गिरोह कई वर्षों से सक्रिय था और गरीब परिवारों की बच्चियों को अपने जाल में फंसाकर उनसे सौदा करता था। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक नाबालिग को पुलिस अभिरक्षा में लिया गया है।

कैसे हुआ मामले का खुलासा?

नाबालिग लड़कियों की तस्करी का यह मामला तब सामने आया जब मोहनलालगंज क्षेत्र के गनिहार गांव से दो नाबालिग बहनें अचानक लापता हो गईं। परिवार की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की।

लड़कियों की दादी ने पुलिस को बताया कि उनकी रिश्तेदार और उसके सहयोगियों ने बच्चियों को उनकी मां से मिलाने का झांसा देकर अपने साथ ले लिया था। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

150 सीसीटीवी कैमरों की मदद से खुली परतें

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने चार विशेष टीमें गठित कीं। इनमें एक टीम सादे कपड़ों में लगातार निगरानी कर रही थी।

तकनीकी जांच बनी सबसे बड़ा हथियार

नाबालिग लड़कियों की तस्करी के इस नेटवर्क तक पहुंचने के लिए पुलिस ने लगभग 150 सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली। इसके अलावा मोबाइल लोकेशन, तकनीकी सर्विलांस और मैनुअल ट्रैकिंग का भी सहारा लिया गया।

हालांकि लड़कियों के मोबाइल फोन बंद थे, फिर भी पुलिस ने लगातार प्रयास जारी रखे और 18 मई को दोनों बच्चियों को सुरक्षित बरामद कर लिया।

मां से मिलाने का झांसा बन गया जाल

जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने बच्चियों की भावनाओं का फायदा उठाया।

वर्षों से मां से दूर थीं दोनों बहनें

आरोपियों ने लड़कियों को भरोसा दिलाया कि उन्हें उनकी मां से मिलवाया जाएगा। इसी बहाने दोनों बच्चियों को घर से बाहर निकाला गया।

पुलिस जांच में पता चला कि नाबालिग लड़कियों की तस्करी की इस साजिश के तहत उन्हें पहले रायबरेली ले जाया गया और फिर राजस्थान भेजने की तैयारी की जा रही थी।

गरीब और बेसहारा लड़कियां थीं निशाने पर

पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरोह विशेष रूप से उन बच्चियों को चुनता था जिनके माता-पिता नहीं थे या जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवारों से आती थीं।

शिकायत का डर नहीं होता था

आरोपियों को लगता था कि ऐसे परिवार कानूनी कार्रवाई करने में सक्षम नहीं होंगे। इसी कारण नाबालिग लड़कियों की तस्करी के लिए वे इन्हीं परिवारों को अपना लक्ष्य बनाते थे।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले लड़कियों से दोस्ती करते थे और फिर धीरे-धीरे उनका विश्वास जीत लेते थे।

नए कपड़े और घूमाने का लालच

गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद सुनियोजित थी।

पहले बनाते थे भरोसा

आरोपी लड़कियों को नए कपड़े दिलाने, घूमाने ले जाने और बेहतर जीवन का सपना दिखाते थे। इसके बाद उन्हें अपने साथ रायबरेली ले जाया जाता था।

नाबालिग लड़कियों की तस्करी के इस नेटवर्क में शामिल लोग बच्चियों की तस्वीरें लेकर राजस्थान स्थित अपने सहयोगियों को भेजते थे। तस्वीरों के आधार पर वहां शादी के नाम पर सौदा तय किया जाता था।

राजस्थान में होती थी पैसों के बदले शादी

जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपी प्रिया पटेल ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए।

2020 में बनी थी कड़ी

प्रिया ने बताया कि वह वर्ष 2020 में एक शादी समारोह के दौरान राजस्थान के कोटा में रहने वाली सोनम नामक महिला के संपर्क में आई थी।

सोनम ने कथित तौर पर उसे बताया था कि राजस्थान में गरीब और सुंदर लड़कियों की शादी कराकर अच्छी रकम कमाई जा सकती है। यहीं से नाबालिग लड़कियों की तस्करी का यह नेटवर्क मजबूत होता चला गया।

हर लड़की के बदले मिलता था डेढ़ लाख रुपये तक

पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य हर लड़की के बदले मोटी रकम प्राप्त करते थे।

सौदेबाजी के बाद भेजी जाती थीं लड़कियां

प्रिया ने स्वीकार किया कि उसे एक लड़की की शादी तय कराने के लिए लगभग एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक मिलते थे।

पुलिस के अनुसार नाबालिग लड़कियों की तस्करी के इस गिरोह ने पहले भी कई लड़कियों को राजस्थान भेजा था। हालांकि अभी तक सभी मामलों की पुष्टि नहीं हो पाई है।

रिश्तेदार को भी बनाया गया मोहरा

इस मामले में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया।

नाबालिग रिश्तेदार की मदद ली गई

आरोपियों ने पीड़ित बच्चियों के एक नाबालिग रिश्तेदार को भी अपने साथ मिला लिया था। उसी की मदद से बच्चियों तक पहुंच बनाई गई और उन्हें घर से बाहर निकाला गया।

पुलिस का मानना है कि नाबालिग लड़कियों की तस्करी के इस नेटवर्क में और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी तलाश जारी है।

पुलिस की कार्रवाई जारी

मामले में इस्तेमाल की गई दो गाड़ियों को पुलिस ने जब्त कर लिया है। साथ ही राजस्थान में मौजूद आरोपियों के अन्य सहयोगियों की तलाश भी शुरू कर दी गई है।

कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं तार

अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक स्थानीय गिरोह नहीं बल्कि कई राज्यों में फैला नेटवर्क हो सकता है। इसलिए जांच को और व्यापक किया जा रहा है।

नाबालिग लड़कियों की तस्करी के इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए और अधिक सख्त व्यवस्था की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों ने जताई चिंता

बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि आर्थिक तंगी और पारिवारिक असुरक्षा का फायदा उठाकर बच्चियों को निशाना बनाना बेहद गंभीर अपराध है।

विशेषज्ञों के अनुसार नाबालिग लड़कियों की तस्करी रोकने के लिए समाज, प्रशासन और परिवारों को मिलकर जागरूकता बढ़ानी होगी। साथ ही संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस तक पहुंचानी चाहिए।

लखनऊ पुलिस द्वारा उजागर किया गया यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि समाज के सामने खड़ी गंभीर चुनौती का संकेत है। नाबालिग लड़कियों की तस्करी जैसे अपराधों पर रोक लगाने के लिए सख्त कानूनों के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई जारी है और उम्मीद की जा रही है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

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